Monday, November 3, 2025

*माँ आशा फाउंडेशन के तत्वावधान में हुआ काव्य गोष्ठी का आयोजन


माँ आशा फाउंडेशन के तत्वावधान में हुआ काव्य गोष्ठी का आयोजन


रिपोर्ट - संवाददाता अमित यादव 

लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अंकुर पाठक संयोजन में आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने बाँधा समां*


साहित्य संस्था मां आशा फाउंडेशन के तत्वावधान में लखनऊ इकाई द्वारा एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा। कार्यक्रम का शुभारंभ लखनऊ इकाई के अध्यक्ष कवि अंकुर पाठक व गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कवि अटल नारायण ने दीप प्रज्ज्वलन व मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।

               कवि गोष्ठी की शुरुआत कवयित्री जाह्नवी श्रीवास्त्व की वाणी वंदना से हुई।कवि अविरल शुक्ल ने "जिस दौर में दोस्त सारे हीर लेकर चल रहे हैं, उस दौर में हम देश की तस्वीर लेकर चल रहे हैं।" कविता पढ़ वाहवाही लूटी। कवयित्री सेजल वैश्य ने"क्या बताऊ व्यथा तुमसे हनुमान मैं, कितना तड़पा हूँ मैं जानकी के लिए" गीत पढ़ तालियां बटोरी।कवि वरुण शुक्ला ने " महफ़िल सजी थी जिसमें कि आना था आपको, 

सुनना था आपको ही

 सुनाना था आपको" गीत पढ़ समां बाँधा। कवि सचिन अमान ने"जब कोई ना मिले इश्क़ करने को ,यकीन मानो अंधी से तो कानी ही अच्छी" कविता पढ़ गुदगुदाया। कवयित्री जान्हवी श्रीवास्तव ने "दिल से दिल की है ये दस्तक ,जन्मों का ये प्यार है ,

सात वचनों का है बंधन प्राण प्रिय तेरे साथ है ।" गीत पढ़ा।अध्यक्षता कर रहे कवि अटल नारायण की 'अवध में राम जी का भव्य धाम बन गया, मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि अभी बाक़ी है' कविता सराही गई। कवि प्रशांत गुप्ता,विष्णु दुबे, अमिता मिश्रा,अजीत वर्मा ने भी काव्यपाठ किया। संचालन कवि शिखर शर्मा ने किया। अध्यक्ष अंकुर पाठक ने सभी का आभार व्यक्त किया। 

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